संवेदना का अर्थ और प्रत्यक्षीकरण क्या है? प्रकार, विशेषताएं ( गुण ) 2024

संवेदना का अर्थ और प्रत्यक्षीकरण क्या है? प्रकार, विशेषताएं ( गुण ) 2024

Samvedna Meaning in Hindi: – संवेदना का अर्थ समझने के लिए आपको मनुष्य के समझने के तरीके को समझना होगा अगर मैं पूछने के लिए यहाँ प्रश्न करूँ कि समझने के लिए मनुष्य क्या करता हैं? 

अधिकतर लोग यह कहने लग जायेंगे कि समझने के लिए हमें दिमाग लगाना पड़ता हैं मनुष्य का यह कहना एक नार्मल बात हैं लेकिन मनोविज्ञान या वैज्ञानिक नजरिये से ऐसा नहीं होता हैं क्योकि जब हम किसी चीज को समझने का प्रयास करते है

उससे पहले जब हमें उस चीज के बारे में कुछ पता नहीं होता हैं तब हम उस चीज का आभास मात्र करते हैं ( नहीं समझ आया अब आयेगा ) उदहारण के लिए, कोई मनुष्य सामने से आ रहा हैं परन्तु वह बहुत दूर हैं हम उसको देख नहीं पा रहे हैं

लेकिन हमे उसका आभास हो रहा हैं क्योकि हमे मनुष्य की छाया दिखाई दे रही हैं यह संवेदना हैं परन्तु जब वह मनुष्य हमारे नजदीक आता हैं तब हम उसका चेहरा देखकर उसको पहचान लेते हैं कि अरे यह तो रमेश हैं अब यह प्रत्यक्षीकरण हैं

संवेदना का अर्थ और प्रत्यक्षीकरण क्या है? प्रकार, विशेषताएं ( गुण ) 2024

सरल शब्दों में, विश्व की क्रियाओं का अनुभव संवेदना के द्वारा किया जाता हैं 

एग्जाम के उद्देश्य से यह प्रश्न महत्वपूर्ण हैं क्योकि कई बार ऐसे सवालों को पूछ लिया जाता है कि संवेदना का अर्थ और परिभाषा स्पष्ट करें, प्रत्यक्षीकरण क्या है? या प्रत्यक्षीकरण किसे कहते हैं?, संवेदना का अर्थ बताइए?, ( Samvedna Ka Arth ) 

इस लेख में सब कुछ अच्छे से समझाया जाएगा अब हम यह जान लेते है कि संवेदना क्या है? ( Samvedna Kya Hai ) 

संवेदना क्या है? संवेदना का अर्थ? ( Samvedna Meaning in Hindi ) – Samvedana Meaning in Hindi

संवेदना एक ऐसे सरल मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा हमे वस्तु एंव व्यक्तियों के बारे में एक आभास ( अनुभूति ) मात्र होता है क्योकि इसमें अर्थहीनता एंव अस्पष्टता होती हैं मतलब ज्ञानेंद्रिययों के द्वारा,

वातावरण के कोई भी उद्दीपक या वस्तु को जानने की प्रक्रिया संवेदना हैं इसीलिए इसको जीवन का प्रारंभिक और सरल मानसिक अनुभव कहा जाता हैं

Dr. जलोटा – संवेदना एक साधारण ज्ञानात्मक अनुभव हैं

जेम्स – संवेदना ज्ञान के मार्ग में प्रथम वस्तु हैं

Douglas & Holland – सरलतम चेतन अनुभवों की व्याख्या के लिए संवेदना का प्रयोग किया जाता हैं

क्रूज – उत्तेजना के प्रति जीव के प्रथम प्रतिक्रिया ही संवेदना हैं

भाटिया – संवेदना एंव अर्थ का योग प्रत्यक्षीकरण हैं मतलब संवेदना + अर्थ = प्रत्यक्षीकरण

रायबर्न – अनुभव के अनुसार संवेदना की व्याख्या ही प्रत्यक्षीकरण हैं

बुडवर्थ – प्रत्यक्षीकरण इन्द्रियों की सहायता से वस्तुओं तथा बाहय घटनाओं तथा तथ्यों को जानने की प्रक्रिया हैं

Wood & Wood ( 1996 ) – मनोवैज्ञानिक ने कहा कि संवेदना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा ज्ञानेंद्रियां द्रष्टि, श्रवण एंव अन्य संवेदी उद्दीपकों की पहचान करके उसकी सुचना मस्तिष्क को देती हैं 

इस परिभाषा का विश्लेषण करने के बाद कुछ बातों से संवदेना के अर्थ को समझा जा सकता हैं

  • संवेदन एक संज्ञानात्मक मानसिक प्रक्रिया है क्योकि इसके माध्यम से वस्तु, व्यक्तियों, उद्दीपकों या घटनाओं का एक अस्पष्ट ज्ञान हमे होता है
  • संवेदन एक आरंभिक मानसिक प्रक्रिया है क्योकि किसी वस्तु पर चितन करने के लिए यह जरुरी हैं कि पहले उसकी संवेदना हो
  • संवेदन में उदीपकों का आभास मात्र होता है मतलब अर्थरहित ज्ञान होता है
  • संवेदन के लिए उद्दीपक की उपस्थिति अनिवार्य हैं

सरल शब्दों में, संवदेना एक आरंभिक संज्ञानात्मक मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा हमे उद्दीपक का आभास मात्र या अर्थरहित ज्ञान होता है संवदेना का उत्तपन होना उद्दीपक, ज्ञानेंद्रियां , मस्तिष्क की जरुरत होती है

क्योकि हम वातावरण में उद्दीपकों को, ज्ञानेंद्रियां के माध्यम से ग्रहण करके, सुचना हमारे मस्तिष्क तक जायेगी जिसके कारण एक मानसिक प्रक्रिया शुरू होती है जिसको हम संवेदना कहते है

उदहारण के लिए, कोई मनुष्य कोई आवाज ( उद्दीपक ) सुनता है जिसके कारण आवाज की ध्वनी तरंगे उस मनुष्य के कान ( ज्ञानेंद्रिय ) में प्रवेश करती हैं और श्रवण तंत्रिका आवेग उत्तपन करती हैं जो मस्तिष्क में पहुँचती हैं

उसके बाद जो पहली मानसिक प्रक्रिया होती है उसको संवेदना कहते हैं क्योकि मनुष्य ने जो आवाज सुनी उसका उसे केवल आभास मात्र होता हैं मतलब हमे उसके आयाम का कोई अर्थ पता नहीं चलता हैं

संवेदना के होने के लिए कुछ बातों का होना महत्वपूर्ण होता हैं 

  1. उद्दीपक की उपस्थिति
  2. ज्ञानेंद्रिय क्रियाशीलता
  3. बोध-स्नायु द्वारा उद्दीपक का समाचार मस्तिष्क तक पहुंचना
  4. मस्तिष्क द्वारा उद्दीपक की उपस्थिति का अनुभव
  5. मस्तिष्क द्वारा संवेदना के अर्थ का ज्ञान होना

संवदेना के गुण ( विशेषताएं ) ( Characteristics Of Sensation )

संवेदना के कुल छ; गुण होते हैं जिनके आधार पर हम संवेदना की पहचान कर सकते हैं

  • संवेदना का कोई न कोई प्रकार जरुर होता हैं यह द्रष्टि संवेदना, श्रावण संवेदना, घ्राण संवेदना, स्वाद संवेदना, त्वक्र संवेदना हो सकती हैं
  • तीव्रता की मात्रा सभी संवेदनों में एकसमान नहीं होती है मतलब कोई संवेदन अधिक तीव्र होता है कोई संवेदन कम तीव्र होता है एक प्रकार की संवेदना अपनी तीव्रता के अंतर के कारण भिन्न अनुक्रिया उत्त्पन्न करती हैं

उदहारण के लिए, 25W का बल्ब जलने और 100W का बल्ब जलने से क्रमश: कम तीव्र और अधिक तीव्र संवेदना का अनुभव होगा

  • कोई भी संवेदना अधिक स्पष्ट या कम स्पष्ट हो सकती है परन्तु, स्पष्टता संवेदना का कोई स्वतंत्र गुण नहीं हैं यह बहुत कुछ तीव्रता और अवधि के गुण पर आधारित होता हैं

उदहारण के लिए, यदि कोई वस्तु को धुंधली रौशनी में बहुत कम समय के लिए दिखाया जाए और फिर उसी वस्तु को तीव्र रौशनी में अधिक समय के लिए दिखाया जाए तो दुसरी परिस्थिति में, पहली परिस्थिति की तुलना में अधिक स्पष्ट संवेदना होगी

  • कोई संवेदन जितने समय तक के लिए होता हैं वह उसकी अवधि होती हैं प्रत्येक संवेदन एक ख़ास ( विषय ) समय ( अवधि ) के लिए होता हैं दो संवेदन प्रकार और तीव्रता में समान होने पर भी अवधि के भिन्न होने के कारण हमे अलग अलग लगेंगे

उदहारण के लिए, यदि किसी वस्तु को एक – एक सेकंड के लिए देखा जाए और फिर, उसी वस्तु को दस सेकंड के लिए देखा जाए तो इन दोनों परिस्थियों में उत्त्पन्न संवेदना भिन्न होंगी

  • किसी भी संवेदना की उत्पत्ति में ज्ञानेंद्रियां का जितना भाग उत्तेजित होता हैं उसे हम संवेदना का विस्तार ( प्रसार ) कहते हैं विस्तार का गुण स्पर्श संवेदन में अधिक स्पष्ट ढंग से देखने को मिलता हैं यह ज्ञानेंद्रियों के उत्तेजित होने वाले क्षेत्र पर निर्भर करता हैं

उदहारण के लिए, यदि कोई मनुष्य आपकी त्वचा को एक ऊँगली से स्पर्श करे और फिर वह व्यक्ति आपके उसी स्थान की त्वचा को अपनी पांचो उँगलियों से स्पर्श करे तब दुसरी परिस्थिति में,

पहली परिस्थिति की तुलना में संवेदना का प्रसार अधिक होगा क्योकि पांच उँगलियों से स्पर्श किये जाने वाली त्वचा का क्षेत्र निश्चित रूप से, एक ऊँगली से स्पर्श किये जाने वाली त्वचा के क्षेत्र से बड़ा होगा

  • व्यक्ति किसी भी संवेदना का मात्र अनुभव नही करता है बल्कि उसका स्थान निर्धारण भी कर लेता हैं और संवेदना की इस विशेषता को हम स्थानीय चिन्ह कहते हैं

उदहारण के लिए, यदि को व्यक्ति पीछे से हमारी पीठ पर हाथ रखता हैं तो हम बिना देखे यह निर्धारित कर सकने में समर्थ हो जाते हैं कि पीठ के कौन-से भाग पर हाथ रखा गया हैं

संवेदना के प्रकार ( Types Of Sensation )

प्रकार के अनुसार संवेदना निम्न होती हैं 

  1. द्रष्टि संवेदना ( आँख के माध्यम से )
  2. श्रावण संवेदना ( कान के माध्यम से )
  3. घ्राण संवेदना ( नाक के माध्यम से )
  4. स्वाद संवेदना ( जीभ के माध्यम से )
  5. त्वक्र/स्पर्श संवेदना ( त्वचा के माध्यम से )

प्रत्यक्षीकरण क्या है? प्रत्यक्षीकरण किसे कहते हैं? ( प्रत्यक्षण का अर्थ ) – Perception in Hindi

विभिन्न वस्तुओं का ज्ञान हम अपनी ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से प्राप्त करते है कुल 5 ज्ञानेंद्रियां होती हैं आँख ( देखने के लिए ), नाक ( सूंघने के लिए ), कान ( सुनने के लिए ), जीभ ( स्वाद के लिए ), त्वचा ( स्पर्श के लिए ) | एक समय में एक या एक से अधिक ज्ञानेंद्रियां काम करती है

उदहारण के लिए, किसी मनुष्य के द्वारा गुलाब के फुल को देखना, इस दौरान उसको गुलाब का फुल कैसा दिख रहा है? यह पता चल रहा हैं परन्तु, अगर मनुष्य उस गुलाब के फुल को देखने के साथ साथ उसको सूंघेगा

तब वह मनुष्य अपनी नाक से सूचना प्राप्त करेगा, अगर वह उसके एक पत्ते को खा लेगा तब वह जीभ से सुचना प्राप्त करेगा, अगर वह उसको छुने का प्रयास करेगा तब वह स्पर्श से सुचना प्राप्त करेगा

प्रत्यक्षीकरण का अर्थ 

प्रत्यक्षीकरण एक जटिल मानसिक प्रक्रिया हैं जिसमे मनुष्य उद्दीपक का तात्कालिक ज्ञान प्राप्त करता हैं और संवेदना में पूर्व अनुभव के आधार पर सही अर्थ जोड़ देता हैं प्रत्यक्षीकरण प्रक्रिया के दौरान हम नई नई इनफार्मेशन को प्राप्त करते हैं

संवेदना + अर्थ/व्याख्या = प्रत्यक्षीकरण 

उदहारण के लिए, यदि कोई व्यक्ति ( उद्दीपक ) बहुत दूर हैं और वह हमे दूर से आता दिखाई दे रहा हैं इस स्थिति में शुरुआत में, हमे केवल काली छाया दिखाई देती हैं परन्तु, वह कौन हैं? यह हमे नहीं पता होता हैं यह स्थिति संवेदना हैं

लेकिन जब वह मनुष्य धीरे धीरे नजदीक आता हैं तब हम यह जान लेते हैं कि वह मनुष्य राम ( मान लो भाई ) हैं अब यहाँ इस संवेदना में हमने अर्थ ( पहचान ) जोड़ दिया इसीलिए यह स्थिति प्रत्यक्षीकरण हैं क्योकि यहाँ हमे उस व्यक्ति का ज्ञान प्राप्त हो गया

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, प्रत्यक्षीकरण की परिभाषा 

कोलिन्स एंव ड्रेवर – प्रत्यक्षीकरण किसी वस्तु का तात्कालिक ज्ञान हैं या संवेदना द्वारा सभी ज्ञानेंद्रियों का ज्ञान हैं

मैकडूगल – उपस्थित वस्तुओं के विषय में सोचना ही प्रत्यक्षीकरण करना है एक वस्तु तभी तक उपस्थित कही जाती हैं जब तक कि उससे आने वाली उत्तेजना हमारी ज्ञानेंद्रियों को प्रभावित करती रहती है

फोर्गस ( 1996 ) – में कहा कि प्रत्यक्षीकरण को पर्यावरण में सुचना का अवशोषण करने वाले प्रक्रम के रूप में माना हैं

एटकिन्सन, एटकिन्सन तथा हिलगार्ड – ने कहा कि प्रत्यक्षीकरण एक ऐसी प्रक्रिया हैं जिसके द्वारा हम पर्यावरण में उपस्थित उद्दीपक-प्रतिरूपों को संगठित करते हैं एंव व्याख्या करते हैं

बोरिंग – धारणा श्रंखला की पहली घटना हैं जो उत्तेजना से क्रिया की और ले जाती है

स्टैंग्नर – बोध इन्द्रियों के माध्यम से बाहरी वस्तुओं और घटनाओं का ज्ञान प्राप्त करने की क्रिया है

प्रत्यक्षीकरण की प्रक्रिया ( Perception Process )

पहला स्टेप = उद्दीपक का उपस्थित होना

दुसरा स्टेप = ज्ञानेंद्रियों का उत्तेजित होना ( एक या एक से अधिक )

तीसरा स्टेप = स्नायु प्रवाह ( नर्व इम्पल्स ) का उत्पन्न होना

चौथा स्टेप = स्नायु प्रवाह ( नर्व इम्पल्स ) का मस्तिष्क में पहुंचना

पांचवा स्टेप = संवेदना का अनुभव

छठा स्टेप = संवेदना में सही अर्थ जोड़ देना ( पूर्व अनुभव के आधार पर )

सातवा स्टेप = प्रत्यक्षीकरण

( Approches Of Perception )

जब हम किसी वस्तु, व्यक्ति या चीज के बारे में प्रत्यक्षीकरण करते है तो यहाँ मुख्य रूप से दो कंडीशन होती है

  1. Bottom Up Processing
  2. Top Down Processing

Bottom Up Processing – जिसमे हम नए सिरे से चीजो को समझते हैं इसमें हमारे पास कोई पुराना अनुभव नहीं होता हैं मतलब यह पुरे पैटर्न को पहचानने की प्रक्रिया में उत्तेजना की बुनियादी विशेषताओं का पता लगाने में संवेदी रिसेप्टर्स के महत्त्व पर जोर देता है इसको हम डेटा संचालित ( Data Driven ) भी कहते हैं

  • डेटा संचालित ( Data Driven )
  • आने वाले संवेदी डेटा पर ध्यान केंद्रित करता है
  • वास्तविक समय में होता है

उदहारण के लिए, किसी ( A ) मनुष्य का किसी ऐसे ( B ) मनुष्य से मिलना जिसको वह पहले न मिला हो, क्योकि ( A ) मनुष्य, ( B ) मनुष्य से पहले नहीं मिला है इसीलिए वह उससे मिलने पर कुछ इनफार्मेशन प्राप्त करेगा

Top Down Processing – इसमें हमारे पास पहले से पुराना अनुभव, इनफार्मेशन, अपेक्षाएँ होती हैं मतलब यह सार्थक धारणाओंतक पहुँचने में पर्यवेक्षक के ज्ञान, अपेक्षाओं और अन्य संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के महत्त्व पर जोर देता हैं

  • जानकारी को प्रासंगिक संकेतों का उपयोग करके व्याख्यायित किया जाता है
  • उपयोगकर्ता का पिछला अनुभव और अपेक्षाएँ

उदहारण के लिए, कोई ( A ) मनुष्य का किसी ( B ) मनुष्य से मिलता हैं जिसको वह पहले से जनता है, ऐसी स्थिति में आप उस मनुष्य के लिए पहले से कुछ अनुमान लगाते हैं

प्रत्यक्षीकरण में सम्मिलित प्रक्रियाएँ

प्रत्यक्षीकरण में पांच प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं 

ग्राहक ( ज्ञानेंद्रियां ) प्रक्रिया – जब भी कोई उद्दीपक किसी व्यक्ति के समाने आता हैं तब व्यक्ति उससे संबंधित ज्ञान, ज्ञानेंद्रिययों के माध्यम से ग्रहण करता हैं और उससे संबंधित सुचना मस्तिष्क में पहुंचती हैं, तब व्यक्ति को उद्दीपक का प्रत्यक्षीकरण होता है इस क्रिया को ग्राहक प्रक्रिया कहते है

प्रतीकात्मक प्रक्रिया – हमारे पूर्व अनुभव, हमारे मष्तिस्क ( दिमाग ) में प्रातिकों के रूप में उपस्थित रहते हैं जब हम किसी उद्दीपक का प्रत्यक्षीकरण करते हैं तो उद्दीपक से संबंधित प्रतीक सजग जाते है जिसे प्रतीकात्मक प्रक्रिया कहते है

उदहारण के लिए, जब मनुष्य इमली को देखता हैं तब, इमली के गुण, मनुष्य के मस्तिष्क में प्रतीक के रूप में मजूद होते हैं इसीलिए मनुष्य जब इमली को देखता हैं तब बिना उसको चखे, मनुष्य का मुंह खट्टा हो जाता हैं

भावात्मक प्रक्रिया – किसी वस्तु का प्रत्यक्षीकरण जब कोई व्यक्ति करता हैं तब उसके मन में कोई न कोई भाव उत्तपन होता है जिसे भावात्मक प्रक्रिया कहते हैं किसी वस्तु का प्रत्यक्षीकरण करने पर हमे सुख का भाव भी आ सकता हैं और किसी वस्तु का प्रत्यक्षीकरण करने पर हमे दुःख का भाव आ सकता हैं

एकीकरण प्रक्रिया – किसी वस्तु प्रत्यक्षीकरण में जो विभिन्न संवेदनाएं होती हैं उनका एकीकरण किया जाता हैं यह एकीकरण मनुष्य के मस्तिष्क में होता हैं जैसे -हम किसी वस्तु को अलग अलग गुणों का, अलग अलग ज्ञानेंद्रियों से ज्ञान ग्रहण करते हैं

उदहारण के लिए, गुलाब के फुल का रंग, आकर और बनावट मनुष्य अपनी आँखों से, सुगंध को नाक से, स्वाद को जीभ से और उसके स्पर्श को अपने हाथो से महसूस करता हैं परन्तु, मनुष्य के मस्तिष्क में जाने के बाद इन सभी संवेदना का एकीकरण हो जाता हैं

विभेदीकरण प्रक्रिया – हम बहुत सारे उद्दीपको में से किसी ख़ास उद्दीपक को प्रथक कर लेते है जबकि वह सारे उद्दीपक मिले जुलते होते हैं जैसे – ग्वाला वह भेसों के झुण्ड में से अपनी भेस का प्रत्यक्षीकरण कर लेता है जबकि देखने में सभी भेसे एक जैसे दिखाई देती हैं यह विभेदीकरण की प्रक्रिया होती है

संवेदना और प्रत्यक्षीकरण में अंतर? ( Characteristics Of Perception & Characteristics Of Sensation ) – विशेषताएं

संवेदना ( Sensation )  प्रत्यक्षीकरण ( Perception )
संवेदना एक प्रथमिक मानसिक प्रक्रिया हैं मतलब यह पहले होती हैं परन्तु प्रत्यक्षीकरण एक द्वितीयक मानसिक प्रक्रिया हैं मतलब यह बाद में होती हैं
संवेदना सरल मानसिक प्रक्रिया हैं जबकि प्रत्यक्षीकरण एक जटिल मानसिक प्रक्रिया होती है
शुद्ध संवेदना केवल शिशुओं की होती हैं क्योकि जैसे जैसे मनुष्य बड़ा होता जाता हैं तब हम अपनी होने वाली संवेदना में तुरंत अर्थ जोड़ देते हैं जिससे वह प्रत्यक्षीकरण बन जाती हैं क्योकि शिशुओं को विभिन्न उद्दीपकों के बारे में ज्ञान नहीं होता हैं लेकिन प्रत्यक्षीकरण कुछ विकसित अवस्था में होता हैं मतलब जीवन भर मनुष्य के साथ मुख्य रूप से प्रत्यक्षीकरण होता है
संवेदना में व्यक्ति निष्क्रिय होता हैं क्योकि इसमें मनुष्य को कुछ नहीं करना होता हैं केवल ज्ञानेंद्रियां यहाँ काम करती हैं जबकि प्रत्यक्षीकरण में व्यक्ति पुरी तरह से सक्रिय होता हैं क्योकि मनुष्य का पूर्व अनुभव स्मृतिचिन्ह के रूप में मनुष्य के मस्तिष्क में होता हैं जिसका उपयोग करके मनुष्य वस्तु का प्रत्यक्षीकरण करता हैं इसीलिए उसका मस्तिष्क सक्रिय होता है
संवेदना में किसी भी उद्दीपक का केवल परिचयात्मक ज्ञान होता है मतलब केवल एक आभास मात्र होता हैं परन्तु, प्रत्यक्षीकरण में उस उद्दीपक का पूरा ज्ञान होता है मतलब वस्तु विषयक ज्ञान होता हैं
संवेदना एक आंशिक क्रिया हैं मतलब संवेदना जब होती है तब केवल संवेदना होती हैं प्रत्यक्षीकरण एक सम्पूर्ण प्रक्रिया हैं जिसमे संवेदना भी शामिल हैं
संवेदना का संबंध मस्तिष्क के ज्ञान केन्द्रों से ही होता हैं जबकि प्रत्यक्षीकरण का सम्बन्ध मस्तिष्क में ज्ञान केंद्र के साथ – साथ साहचर्य क्षेत्र से भी होता है क्योकि हमारा अनुभव साहचर्य क्षेत्र विद्यमान होता है जहाँ से हम संवेदना में उनको जोड़कर प्रत्यक्षीकरण करते हैं

 

प्रत्यक्षीकरण की विशेषताएं ( Characteristics Of Perception )

  1. प्रत्यक्षीकरण में एक वस्तु एक इकाई के रूप में दिखती हैं
  2. किसी वस्तु को देखते ही उससे जुड़ा विचार तुरंत याद आ जाता है जैसे – साप को देखकर डर के भाग जाना
  3. प्रत्यक्षीकरण में ज्ञान का अर्थपूर्ण होता है
  4. प्रत्यक्षीकरण में गुण का पुर्नस्मरण भी होता हैं
  5. पुर्नस्मरण में हमेशा पहचान होती हैं
  6. उद्दीपक जानने के लिए व्यक्ति का ध्यान लगा रहता हैं

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निष्कर्ष

यहाँ हमने संवेदना और प्रत्यक्षीकरण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषता सहित सम्पूर्ण इनफार्मेशन को बताया हैं बीए स्टूडेंट्स के लिए यह लेख महत्वपूर्ण हैं

मैं यह उम्मीद करता हूँ कि कंटेंट में दी गई इनफार्मेशन आपको पसंद आई होगी अपनी प्रतिक्रिया को कमेंट का उपयोग करके शेयर करने में संकोच ना करें अपने फ्रिड्स को यह लेख अधिक से अधिक शेयर करें

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