तंत्रिका तंत्र किसे कहते हैं? व्यवहार के जैविक आधार, न्यूरॉन, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ( 2024 )

तंत्रिका तंत्र किसे कहते हैं? व्यवहार के जैविक आधार, न्यूरॉन, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ( 2024 )

Nervous System in Hindi; – तंत्रिका तंत्र किसे कहते हैं? मनुष्य के शरीर में तंत्रिका तंत्र का स्थान मनुष्य के दिमाग ( मस्तिष्क ) में होता है मनुष्य की पुरी बॉडी को कण्ट्रोल करने का काम तंत्रिका तंत्र ( Tantrika Tantra ) के द्वारा किया जाता हैं 

तंत्रिका तंत्र में न्यूरॉन का महत्त्व सबसे अधिक होता है क्योकि तंत्रिका तंत्र का नामांकित चित्र ( Tantrika Koshika Ka Chitra )  देखने पर हम यह समझ सकते है कि मनुष्य के शरीर में अधिक मात्रा में न्यूरॉन पाए जाते हैं 

क्योकि मनुष्य के तंत्रिका तंत्र में सीएनएस और पीएनएस का भाग होता हैं सीएनएस में मनुष्य का ब्रेन और रीड की हड्डी आती हैं सीएनएस और पीएनएस दोनों भागों में न्यूरॉन होते हैं जो इनफार्मेशन ( प्राप्त संकेत ) को हमारे मस्तिष्क तक,

पहुंचाने और वापस लाने का काम करते हैं बीए प्रथम वर्ष में एग्जाम के दौरान स्टूडेंट से यह सवाल पूछ लिया जाता है कि तंत्रिका तंत्र क्या है? तंत्रिका तंत्र के कार्य सहित तंत्रिका तंत्र का चित्र बनायें?

तंत्रिका तंत्र किसे कहते हैं? व्यवहार के जैविक आधार, न्यूरॉन, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ( 2024 )

परन्तु स्टूडेंट को इन्टरनेट पर यह विषय अच्छे से समझ नहीं आता हैं इसीलिए हमारे लेखक नितिन सोनी के द्वारा आपको सम्पूर्ण तंत्रिका प्रणाली मतलब तंत्रिका क्या है?, तंत्रिका तंत्र के प्रकार, तंत्रिका तंत्र की संरचना, मानव तंत्रिका तंत्र का चित्र,

तंत्रिका तंत्र के भाग, तंत्रिका तंत्र के क्या कार्य है, नर्वस सिस्टम कितने प्रकार के होते हैं सब कुछ अच्छे से समझाया गया हैं अब हम तंत्रिका तंत्र किसे कहते हैं? ( Nervous System Kya Hai ) जानने से पहले व्यवहार के जैविक आधार समझ लेते हैं 

व्यवहार का जैविक आधार

जैविक आधार को समझने के लिए हमे शरीर विज्ञान के अध्ययन विषय को अपनाना होगा क्योकि शरीर विज्ञान प्राणी के शरीर की यंत्र रचना की व्याख्या करता हैं और मनोविज्ञान का अध्ययन विषय शरीर विज्ञान की इन यंत्र प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ होता हैं

प्राणी के व्यवहार की व्याख्या का सूत्र 

S ( Stimulus/उद्दीपक )  – O ( Organism/प्राणी )  – R ( Response/प्रतिक्रिया )

मतलब जब किसी प्राणी को कोई उद्दीपक मिलता है और प्राणी जो अनुक्रिया करता है वह उसका व्यवहार होता हैं

शारीरिक प्रक्रियाओं के रूप में 

R ( Receptors/संग्राहक ) – A ( Adjustors/समायोजक ) – E ( Effectors/प्रभावक ) 

नोट – प्राणी जगत में मनुष्य और पशु दोनों शामिल होते हैं और दोनों के व्यवहार में पूर्ण रूप से समानता नहीं है क्योकि मनुष्य एक समाजिक प्राणी हैं इसीलिए उसका व्यवहार समाज की गतिविधियों से प्रभावित होता हैं

परन्तु, पशुओं का व्यवहार यंत्रव्रत दिखाई देता हैं इसीलिए मानव व्यवहार के जैविक और समाजिक आधार प्रधान रूप से कार्य करते हैं जबकि पशुओं का व्यवहार केवल जैविक होता है 

संग्राहक ( Receptors ) – प्राणी के व्यवहार की व्याख्या में उद्दीपक प्राणी अनुक्रियाओं की यांत्रिक रचना समलित ( शामिल ) किया जाता है पर्यावरण के बाहय पदार्थ उद्दीपकों के रूप में काम करते हैं और मानव शरीर की ज्ञान इन्द्रियों के,

सम्बंधित भाग को उत्तेजना प्रदान करते हैं यही उत्तेजना मानव शरीर के उस भाग को उत्तेजित करती है जहाँ से अनुक्रिया प्रशासक होती हैं मानव के शरीर में संग्राहक ( Receptors ) भिन्न भिन्न स्थानों पर पाए जाते है और संरचना व सम्बंधित क्रिया के आधार पर उनमे भेद भी पाया जाता हैं

ग्राहकों का सामान्य वर्गीकरण

वर्ग ( Class ) संवेदीज्ञान ( Sense ) वर्गीकरण का आधार ( Bases Of Classification )
बाहयग्राहक – आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा दृष्टि, ध्वनी, घ्राण ( सुन्गना ), स्वाद, त्वचा में दर्द, दबाब, गर्मी शरीर की सतह पर आधारित ग्राहक हैं वह उद्दीपकों के प्रति अनुक्रिया करते हैं
अंतग्राहक आंगिक दर्द, दबाब, गर्मी, ठण्ड, घ्राण ( सुन्गना ), स्वाद ऐसे ग्राहक शरीर के भीतर पाचन एंव मूल तंत्रीय क्षेत्रों में होते हैं तथा शरीर के भीतर के उत्तेजनों के प्रति अनुक्रियाशील होते है

मध्यग्राहक

मांसपेशीय गतिबोध, कंडरा गतिबोध, संधि गतिबोध, वेस्टीब्यूलर गतिबोध ऐसे ग्राहक मांसपेशियों, कंडरा, संधि, तथा अश्रवण अंत:कर्ण ( कान ) में होते है और शारीरिक गतियों के प्रति अनुक्रिया करते है और शारीरिक गतियों के रूप में इनके द्वारा अनुक्रिया की जाती है
नोसी ग्राहक त्वचा दर्द, आंगिक दर्द, गति संवेदी दर्द प्राणी के पुरे शरीर में यह फैले होते हैं तथा धातक उद्दीपकों के प्रति अनुक्रिया करते हैं

 

समायोजक ( Adjustors ) – संग्राहकों के बाद व्यवहार के जैविक आधार में समायोजक का स्थान आता हैं क्योकि संग्राहक क्रियातंत्र संवेदना ग्रहण करने के बाद सूचना अंतिम क्रिया के लिए समायोजक क्रियातंत्र को देता हैं

यही क्रियातंत्र को तंत्रिका तंत्र ( Nervous System ) कहा जाता हैं इसको स्नायुतंत्र या स्नायुमंडल के नाम से भी जाना जाता है 

प्रभावक ( Effectors ) – प्रभावक कोशिकाओं से तात्पर्य उन कोशिकाओं से होता है जिनकी मदद से प्राणी उद्दीपक के प्रति अनुक्रिया करता हैं प्राणी में दो तरह ( प्रकार ) के प्रभावक पाए जाते हैं 

  1. मांसपेशियाँ 
  2. ग्रंथि 

मांसपेशियाँ – मांसपेशियों का निर्माण कई तरह की व्यक्तिगत कोशिकाओं से होता हैं और मानव शरीर में तीन तरह की मांसपेशियाँ पाई जाती हैं चिकनी मांसपेशियाँ, रेखित मांसपेशियाँ और हृदय संबंध मांसपेशियाँ |

  • चिकनी मांसपेशियाँ – इनको अरेखित या अधारीदार मांसपेशियाँ भी कहा जाता है यह मानव शरीर के आंतरिक अंगो जैसे – आंत, परितारिका, पेट, पाचन तंत्र, फेफड़े, रक्त वाहिकाओं आदि में पाई जाती है 
  • रेखित मांसपेशियाँ – इनको कंकालीय मांसपेशी भी कहा जाता है ऐसे मांसपेशियाँ देखने में धारीदार या रेखांकित होती है मतलब रेखाएं बनी होती हैं यह हाथ, पैर, बाह आदि अंगो में पाई जाती है

ऐसी मांसपेशियाँ चिकनी मांसपेशियों से अधिक लम्बी होती है तथा एक विशेष लचीलेदार झिल्ली में बंद होती है जिनको सारकोलेम्मा कहते हैं ऐसे मांसपेशियों के संकुचनशील ( सिकुड़े हुए ) तंतु दो विशेष तत्वों में बटे होते है

जिनमे से एक दुसरे की तुलना में अधिक डार्क होता है ऐसे बटवारे के कारण ऐसी मांसपेशियां देखने में धारीदार होती है 

  • हृदय संबंध मांसपेशियाँ – यह मांसपेशियाँ ह्रदय में होती है और उनके संकुचन ( सिकुडन ) तथा फैलाव से ह्रदय अपना कार्य करता है मतलब ह्रदय मांसपेशियाँ रेखित मांसपेशियों का एक भाग होता है और ह्रदय मांसपेशियों की मुख्य विशेषता,

यह होती है कि ऐसी ह्रदय मांसपेशियों के तंतु न तो समांतर होते हैं और न ही किसी प्रकार की झिल्ली में घिरे होते है परन्तु इनमे कुछ शाखाएं होती है जो एक दुसरे से मिलकर जालीनुमा दिखाई देती है 

सभी मांसपेशियों के प्रकार में मांसपेशियों के द्वारा संकुचन का कार्य किया जाता है और समायोजक या केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जैसे ही मांसपेशी को उत्तेजक मिलता हैं

उनमे दैहिक और रासायनिक घटनाएं घटने लगती है जिनके संकुचन के रूप में मांसपेशी में ऊर्जा बाहर निकलने लगती है

ग्रंथि – यह दुसरा मुख्य फैक्टर है जिसका कार्य कुछ ऐसे रासायनिक तत्वों का स्त्राव करना होता है जिनसे व्यक्ति अपने शरीर के भीतर संतुलन बनाये रख पाता हैं इस तरह ग्रंथि द्वारा मनुष्य अपने आंतरिक वातावरण में संतुलन उसी तरह बनाये रखता है 

जिस तरह से मांसपेशियों द्वारा बाहय वातावरण के साथ संतुलन स्थापित करना होता है मुख्य रूप से ग्रंथि दो प्रकार की होती है 

  1. बहिःस्रावी ग्रंथियाँ – जिनका स्त्राव खून में नहीं मिल पाता है क्योकि इनका स्त्राव एक विशेष नलिका के द्वारा बाहर निकलता है उदहारण के लिए, लार ग्रंथि, आंसू ग्रंथि, पसीने की ग्रंथि आदि 
  2. अंतःस्रावी ग्रंथि – इसको हम नलिकाविहीन ग्रंथियाँ भी कहते है इनसे स्त्राव निकलने के लिए कोई नलिका नहीं होती है इनका स्त्राव सीधे रक्त में मिल जाता है और वह शारीरिक और मानसिक क्रियाओं के विकास को प्रभावित करता है 

इन ग्रंथियों से निकलने वाले स्त्राव को हम हार्मोन कहते है और अंतःस्रावी ग्रंथियों की संरचना एथेलियम से बनी होती है जिसमे नलिकाओं का एक जाल होता हैं जैसे – एड्रिनल ग्रन्थि, अग्नाशय ग्रन्थि, पैराथायरायड ग्रन्थि, पिट्यूटरी ग्रन्थि

परन्तु कुछ ग्रंथियों की संरचना इनसे भिन्न होती है जैसे – थायराइड ग्रन्थि, अण्डाशय ग्रन्थि

तंत्रिका तंत्र किसे कहते हैं? नर्वस सिस्टम क्या है? ( Nervous System in Hindi ) – नर्वस सिस्टम हिंदी – Nervous System Hindi

तंत्रिका तंत्र मनुष्य के शरीर का वह सिस्टम होता है जो मनुष्य के पुरे शरीर को कण्ट्रोल करने का काम करता है मनुष्य के शरीर की सभी एक्टिविटी जैसे – सोचना, खाना, पीना, चलना,

दिल का धड़कना आदि को मनुष्य के शरीर में तंत्रिका तंत्र द्वारा कण्ट्रोल किया जाता है परन्तु, तंत्रिका तंत्र को समझना जटिल होता है क्योकि इसमें बहुत सारे नर्वस पाए जाते है जो एक दुसरे से मिले हुए होते हैं 

तंत्रिका तंत्र का चित्र, tantrika tantra ka chitra

मनुष्य के इस तंत्रिका तंत्र में लाखों की संख्या न्यूरॉन ( Neuron ) होते हैं कोई मनुष्य किसी कार्य को करने के दौरान कैसे रिस्पांस करता है वह तंत्रिका तंत्र पर निर्भर करता हैं तंत्रिका तंत्र न्यूरॉन और न्यूरोग्लियल Cells से मिलकर बना होता है

न्यूरोग्लियल Cells का काम न्यूरॉन को संभालना होता हैं मतलब तंत्रिका तंत्र का काम न्यूरॉन के माध्यम से किया जाता है परन्तु न्यूरॉन को खाना-पीना, न्यूरॉन को सपोर्ट करना,

न्यूरॉन को एक दुसरे से जोड़कर रखने का काम न्यूरोग्लियल Cells के माध्यम से किया जाता हा 

Nervous System = Neurons = Neuroglial Cells 

उदहारण के लिए, आप किचन में गए, जहाँ गैस पर आपका दूध गरम हो रहा था परन्तु, यह आपको पता नहीं था और आपने बिना कुछ सोचे समझें दूध के बर्तन को पकड़ लिया, क्योकि दूध गरम था उस दौरान आपका हाथ उस दूध के बर्तन को तुरंत छोड़ देगा 

परन्तु सच्चाई क्या है? यह एकदम क्या हुआ?

जब आपने अपने हाथ से उस गरम दूध के बर्तन को छुआ उसके बाद तुरंत नर्व इंपल्स ने इनफार्मेशन मस्तिष्क तक पहुँचाया, जहाँ तंत्रिका तंत्र है इस स्थिति में यह तंत्रिका तंत्र तुरंत विश्लेषण करेगा कि आपके उस गरम बर्तन को तोच करने से क्या होगा,

विश्लेषण करने के बाद, तंत्रिका तंत्र तुरंत आपको वह गरम बर्तन छोड़ने का आर्डर देगा जिसके बाद आप उस बर्तन को छोड़ देंगे यह पुरी प्रक्रिया मात्र कुछ मिली सेकंड में हो जाती हैं सरल भाषा में कहा जाए तो इस प्रक्रिया में 1 सेकंड से भी कम समय लगता है 

तंत्रिका तंत्र के प्रकार ( तंत्रिका तंत्र के भाग )

मनुष्य के तंत्रिका तंत्र को मुख्य रूप से दो भागों में बाट दिया गया है 

मानव तंत्रिका तंत्र का चित्र

Central Nervous System ( CNS ) – इसमें Brain और Spinal Cord आते हैं जो आर्डर देने का काम करते हैं 

Peripheral Nervous System ( PNS ) – इनका काम हमारी एक्टिविटी होती हैं 

तंत्रिका तंत्र किसे कहते हैं? व्यवहार के जैविक आधार, न्यूरॉन, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ( 2024 )

Motor ( गतिवाही न्यूरॉन ) – इनका काम ब्रेन और Spinal Cord के द्वारा इनफार्मेशन को वापस लाना होता है 

Sensory ( संवेदी ) – जो मनुष्य फील करता है उस इनफार्मेशन या प्राप्त संकेत को हमारे ब्रेन तक लेकर आता है मतलब ये अभिवाही ( Afferent )/ज्ञानवाही न्यूरॉन्स हैं जो संवेदी अंगों से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ( CNS ) तक प्राप्त संकेत को ले जाते हैं

Somatic Nervous System – वह सिस्टम को मनुष्य के कण्ट्रोल में होता है उदहारण के लिए, मनुष्य का चलना, फिरना आदि 

Automatic Nervous System – यह ऐसा सिस्टम होता हैं जो मनुष्य के कण्ट्रोल में नहीं होता है क्योकि इसमें शरीर की अनचाही प्रतिक्रियाएँ होती हैं उदहारण के लिए, मनुष्य का सांस लेना, दिल का धड़कना, मनुष्य की पाचन क्रिया आदि 

Sympathetic Nervous System ( SNS ) – यह ऐसा सिस्टम होता हैं यह सिस्टम मनुष्य के अंदर असमान्य स्थिति के दौरान सक्रिय होता हैं यह शरीर को लड़ाई, डर जैसी स्थितियों में जीवित रहने में मदद करते हैं 

उदहारण के लिए, किसी मनुष्य के पीछे किसी कुत्ते का पड़ जाना, ऐसी स्थिति में मनुष्य बहुत तेज भागेगा 

Parasympathetic  Nervous System ( PNS ) – यह एक ऐसा सिस्टम होता है जो मनुष्य के शरीर को असमान्य स्थिति में वापस लाने में मदद करता है उदहारण के लिए, पाचन नार्मल होना, हृदय गति का सामान्य होना 

न्यूरॉन क्या है? न्यूरॉन किसे कहते हैं? ( Neurons Meaning in Hindi ) – न्यूरॉन क्या है संरचना व कार्य लिखिए? ( न्यूरॉन्स )

न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र में बुनियादी कार्यात्मक और संरचनात्मक ईकाई होती हैं जिसका काम इनफार्मेशन या नर्व इंपल्स के माध्यम से इनफार्मेशन को तंत्रिका तंत्र तक पहुंचाना होता है इसमें एक न्यूरॉन इनफार्मेशन दुसरे न्यूरॉन को देता है

ऐसा करके वह इनफार्मेशन हमारे मस्तिष्क में तंत्रिका तंत्र तक पहुंचाई जाती है इसीलिए कहा जा सकता है कि न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी ईकाई हैं 

न्यूरॉन का चित्र ( Neurone Ka Chitra ) न्यूरॉन का नामांकित चित्र बनाइए?

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न्यूरॉन का चित्र या न्यूरॉन का नामांकित चित्र

Parts Of a Neuron ( न्यूरॉन के प्रकार ) न्यूरॉन्स के प्रकार 

न्यूरॉन मुख्य रूप से तीन चीजो से मिलकर बनता हैं 

Cell Body ( कोश शरीर ) – इसका काम प्राप्त संकेत को एक्सॉन में भेजना होता हैं यह न्यूरॉन का मुख्य प्रसंस्करण केंद्र है जो नाभिक ( nucleus ) से बना होता है जिसमें आनुवंशिक सामग्री ( Genetic Material ) होती है

इसको हम सोमा भी कहते है इसमें अन्य अंग भी शामिल हैं, लेकिन सेंट्रीओल्स (अमीटोसिस सेल डिवीजन) अनुपस्थित हैं

Dendrites ( वृक्षाभतंतु ) – न्यूरॉन्स से संकेत प्राप्त करने का काम डेन्ड्राइट्स करता हैं ये कोशिका शरीर के विस्तार (शाखाएं) हैं

Axon ( अक्षतन्तु ) – एक्सॉन का काम प्राप्त संकेत को संभलकर एक्सॉन के अंतिम भाग तक भेजना होता है और वह संकेत एक्सॉन टर्मिनल के माध्यम से दुसरे न्यूरॉन में चला जाता है

यह कोशिका शरीर का एक पतला, लंबा, एकल शाखा विस्तार होता हैं इसको तंत्रिका फाइबर के रूप में भी जाना जाता है

Axon Hillock – एक्सॉन हिलॉक वह बिंदु है जहां से एक्सॉन शुरू होता है और क्रिया क्षमता भी यहीं से उत्पन्न होती है

Axolemma – एक्सोलेम्मा एक्सॉन की प्लाज्मा झिल्ली है

Schwann Cells ( श्वान कोशिकाएँ ) – एक्सोलेम्मा के ठीक बाहर होती हैं और एक्सोन को सुरक्षा प्रदान करती हैं

Nucleus: – इसमें न्यूरॉन कोशिका की आनुवंशिक सामग्री होती है

Myelin Sheath ( माइलिन म्यान ) – एक्सॉन में जो इनफार्मेशन ( नर्व इंपल्स ) बह रही है उसकी रक्षा करने का काम करता है और जल्दी रिस्पांस वाली स्थिति में यह माइलिन शीथ के माध्यम से उछल – उछलकर जल्द इनफार्मेशन ( नर्व इंपल्स ) को एक्सॉन टर्मिनल तक पहुंचा देगी माइलिन म्यान श्वान कोशिका की वसायुक्त सामग्री से बना होता है

Axon Terminal ( प्रांत कुंची ) – यह एक्सॉन का अंतिम भाग होता हैं जिसका काम इनफार्मेशन ( नर्व इंपल्स ) को छोड़ना होता हैं इसे सिनैप्टिक नॉब के रूप में भी जाना जाता है। एक्सॉन टर्मिनल में कुछ न्यूरोट्रांसमीटर ( रासायनिक संकेत ) होता हैं

जो रासायनिक संकेत के माध्यम से इनफार्मेशन ( नर्व इंपल्स ) को रिलीज करता है जिसको दुसरा न्यूरॉन अपने डेन्ड्राइट्स के माध्यम से रिलीज करेगा फिर हर न्यूरॉन यह प्रक्रिया करेगा अंत में यह इनफार्मेशन ( नर्व इंपल्स ) ब्रेन के

Central Nervous System ( CNS ) न्यूरॉन तक पहुँच जाती है जिसके बाद इस इनफार्मेशन का विश्लेषण करके दुबारा इस इनफार्मेशन ( नर्व इंपल्स ) को न्यूरॉन के डेन्ड्राइट्स तक पहुँच जाती हैं उसके बाद न्यूरॉन अपनी क्रिया करेगा 

Nodes Of Ranvier: – रनवियर के नोड्स माइलिन म्यान के बीच मौजूद अंतराल हैं

Classification Of Neurons 

न्यूरॉन्स का वर्गीकरण तीन प्रकार से किया जाता है 

  1. कार्यों के आधार पर
  2. संरचना के आधार पर
  3. माइलिन म्यान के आधार पर

कार्यों के आधार पर

इसको तीन प्रकार में विभाजित किया जा सकता है

Sensory Neurons ( संवेदी न्यूरॉन ) – ये अभिवाही ( Afferent )/ज्ञानवाही न्यूरॉन्स हैं जो संवेदी अंगों से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ( CNS ) तक प्राप्त संकेत को ले जाते हैं

Motor Neurons ( गतिवाही न्यूरॉन ) – ये अपवाही ( Efferent ) न्यूरॉन्स हैं जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ( CNS ) से अन्य संवेदी अंगों तकप्राप्त संकेत भेजते हैं

Inter Neurons – ये एसोसिएशन या साहचर्य न्यूरॉन्स हैं जो CNS ( केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ) में मौजूद होते हैं यह Sensory और Motor न्यूरॉन्स दोनों को जोड़ते हैं और विश्लेषण करने का काम भी करते हैं 

संरचना के आधार पर

इसको तीन प्रकार में विभाजित किया जा सकता है

Multipolar Neuron ( बहुध्रुवीय ) – ये वे न्यूरॉन्स हैं जिनमें कोशिका शरीर में कई प्रक्रियाएं होती हैं यह मुख्य रूप से मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में पाए जाते हैं 

Multipolar Neuron ( बहुध्रुवीय )

Bipolar Neuron ( दवीध्रुवीय ) – ये वे न्यूरॉन्स हैं जिनमें कोशिका शरीर में केवल दो प्रक्रियाएं (विस्तार) होती हैं। यह मुख्य रूप से संवेदी कोशिकाओं में पाए जाते हैं 

Bipolar Neuron ( दवीध्रुवीय )

Unipolar Neuron ( एकध्रुवीय ) – ये वे न्यूरॉन्स हैं जिनमें कोशिका शरीर में केवल एक ही प्रक्रिया (विस्तार) होती है।

Microglial Cells

माइलिन म्यान के आधार पर

इसको तीन प्रकार में विभाजित किया जा सकता है

Myelinated Neuron – ये वे न्यूरॉन्स हैं जो माइलिन म्यान की एक मोटी परत से ढके होते हैं इनमें न्यूरॉन्स के द्वारा प्राप्त संकेत ( इनफार्मेशन ) का चालन  उच्च और तेज़ होता है

Non-Myelinated Neuron – ये वे न्यूरॉन्स हैं जिनमें माइलिन म्यान उपस्थित नहीं होती हैं जिसके कारण इनमें न्यूरॉन्स के द्वारा प्राप्त संकेत ( इनफार्मेशन ) का चालन माइलिनेटेड न्यूरॉन्स की तुलना में धीमा होता है परन्तु इसमें एक्सॉन श्वान कोशिकाओं से ढके होते हैं जो संदेश की रक्षा करते हैं

Properties Of Neuron

Excitability – यह न्यूरॉन की उत्तेजनाओं पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता है जिसको Irritability भी कहा जाता है मतलब जब मनुष्य को कोई ऐसा संकेत महसूस होता है जो उसके लिए सही नहीं हैं उस स्थिति में तुरंत हमारे न्यूरॉन उसको महसूस करेंगे और अगले न्यूरॉन को यह संकेत देने के लिए एक्टिव हो जायेंगे 

Conductivity – यह न्यूरॉन की आवेगों (तंत्रिका/विद्युत आवेग) को संचारित करने की क्षमता है मतलब जब मनुष्य का न्यूरॉन संकेत प्राप्त कर लेता हैं तब वह अगले न्यूरॉन को यह संकेत भेज सकता हैं 

Secretion – अंत में यह एक्सॉन टर्मिनल, न्यूरोट्रांसमीटर (रासायनिक हार्मोन) को रिलीज करके, दूसरे न्यूरॉन को प्राप्त संकेत (आवेग) स्थानांतरित ( भेजता ) करता है

Refractory Period – यह वह समय होता है जबजब एक तंत्रिका तंतु ( न्यूरॉन ) एक बार उत्तेजित होता है, तो वह थोड़े समय के लिए दूसरे उत्तेजना पर प्रतिक्रिया नहीं करता हैं मतलब यह एक ऐसा शोर्ट समय होता है जिसमे न्यूरॉन रेस्ट करता है इस समय वह न्यूरॉन प्राप्त इनफार्मेशन को स्थानांतरित नहीं करता हैं 

All or None Law – इस नियम के अनुसार, तंत्रिका तंतु ( न्यूरॉन ) केवल एक विशेष सीमा शक्ति पर ही उत्तेजित होते हैं, जब कम सीमा शक्ति का उद्दीपन लगाया जाता है तो यह उत्तेजित नहीं होगा 

Neuroglial Cells 

यह एक ऐसा सपोर्ट सिस्टम होता है जो न्यूरॉन्स के बीच में सपोर्ट के रूप में काम करता हैं न्यूरोग्लिया ( Neuroglia ) या गिलल कोशिकाओं ( Glial Cells )  के रूप में भी जाना जाता है। सरल शब्दों में Neuroglia को दो भागो में तोडा जा सकता हैं

Neuro + glia. जहाँ Neuro ( न्यूरो ) का अर्थ न्यूरॉन और glia का अर्थ ग्लू ( चिपाने वाला ) होता है मतलब ये न्यूरॉन की सहायक कोशिकाएँ हैं जो न्यूरॉन्स को यांत्रिक और चयापचय सहायता प्रदान करती हैं।

न्यूरोग्लियल कोशिकाओं की संख्या तंत्रिका कोशिकाओं ( न्यूरॉन ) की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक होती है।

Classification Of Neuroglial Cells

तंत्रिका तंत्र किसे कहते हैं? व्यवहार के जैविक आधार, न्यूरॉन, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ( 2024 )

Neuroglial Cells

  1. in CNS 
  2. in PNS 

in CNS 

  1. Astrocytes
  2. Oligodendroytes
  3. Ependymal Cells
  4. Microglial Cells

in PNS 

  1. Schwann Cells 
  2. Satellite Cells

Astrocytes: – ये तारे के आकार की कोशिकाएँ होती हैं जो आमतौर पर रक्त केशिकाओं और मस्तिष्क के न्यूरॉन के बीच में स्थित होती है और रक्त केशिकाओं और मस्तिष्क के न्यूरॉन को जोड़ने का काम करती है यह विषाक्त पदार्थों और जहर को मस्तिष्क के न्यूरॉन्स में प्रवेश करने से रोकती हैं

Astrocytes

Oligodendrocytes – यह तंत्रिका तंतुओं ( Nerve Fibers ) के साथ पंक्तियों में होता है यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के भीतर अक्षतंतु ( एक्सॉन ) के चारों ओर माइलिन म्यान बनाता है

Oligodendroytes

Ependymal Cells – यह आमतौर पर घनाकार कोशिकाएँ होती हैं यह मस्तिष्क के निलय और रीढ़ की हड्डी की परत बनाती है वे स्तंभाकार उपकला हैं और सेरेब्रोस्पिनोल द्रव (सीएसएफ) भी उत्पन्न करते हैं

Ependymal Cells

Microglial Cells – यह सबसे छोटी न्यूरोग्लियोल कोशिका है जो मोनोसाइट्स से प्राप्त होती है और सीएनएस को कवर करती है यह बैक्टीरिया कोशिकाओं और मृत कोशिकाओं के मलबे को फागोसाइटोसिस द्वारा ख़तम करने में मदद करता है

Microglial Cells

Schwann Cells – यह एक ऐसा सिस्टम होता है जो पीएनएस ( PNS ) में मौजूद Glial Cells का समर्थन करता हैं। यह एक्सॉन के चारों ओर एक आवरण बनाता है जिसे माइलिन म्यान कहा जाता है और आवेग को रोकता है

Schwann Cells

Satellite Cells – वे छोटी Glial Cells होती हैं जो न्यूरॉन्स के चारों ओर होती हैं और उनके बाह्य स्थान का निर्माण करती हैं यह न्यूरॉन्स को सुरक्षा प्रदान करती हैं

Satellite Cells

Functions Of Neuroglial Cells

  • यह न्यूरॉन्स को यांत्रिक रूप से सहारा देते हैं
  • यह  बाहरी पदार्थ के मलबे को हटाने का काम करते हैं
  • यह न्यूरॉन्स को पोषण प्रदान करते हैं और न्यूरॉन्स को सुरक्षा भी प्रदान करते हैं
  • यह माइलिन म्यान से भी मदद करते हैं

Central Nervous System in Hindi ( केंद्रीय तंत्रिका तंत्र )

केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के अंतर्गत सुचना को प्राप्त करना व उसके प्रति अनुक्रिया करने का कार्य आता हैं सेंट्रल नर्वस सिस्टम ( केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ) का निर्माण ब्रेन और Spinal Cord से मिलकर बनता हैं 

Central Nervous System in Hindi ( केंद्रीय तंत्रिका तंत्र )

  1. Brain ( ब्रेन ) 
  2. Spinal Cord ( मेरुरज्जू )

Brain ( ब्रेन ) 

ब्रेन को हिंदी भाषा में मस्तिष्क कहा जाता है जिसका वजन ( एक एडल्ट के अनुसार ) लगभग 1000-1200 gram होता हैं मानव शरीर का सबसे अधिक कोमल अंग ब्रेन होता हैं मस्तिष्क के ऊपर तीन आवरण ( झिल्ली ) पाए जाती हैं

  1. Duramater ( बाहरी झिल्ली )
  2. Arachnoid ( मध्य झिल्ली )
  3. Piamater ( आंतरिक झिल्ली )

यह सभी झिल्ली मस्तिष्क को सुरक्षा प्रदान करने का काम करती है मनुष्य के मस्तिष्क में लगभग 100 बिलियन न्यूरॉन्स और 10-15 ट्रिलियन Neurogilia पायी जाती है 

मस्तिष्क की संरचना ( Structure Of Brain )

  • यह मानव शरीर की एक जटिल संरचना है
  • मस्तिष्क ‘क्रेनियम’ से ढका और सुरक्षित रहता है
  • मस्तिष्क का वजन – वयस्क ( Adult ) में लगभग 1000-1200 ग्राम होता हैं 
  • मस्तिष्क का आकार – वयस्क ( Adult ) में लगभग (15 सेमी लंबा, 7 सेमी चौड़ा, 3.5 सेमी मोटा) होता हैं और ब्रेन का बिल्ड जैसा आकार होता हैं 
  • मस्तिष्क में न्यूरॉन की संख्या 100 बिलियन होती हैं 
  • मस्तिष्क में पानी, ऑक्सीजन, वसा, लिपिड, सीएसएफ, प्रोटीन आदि होते हैं

मस्तिष्क के प्रकार ( Types Of Brain )

मस्तिष्क के तीन भाग होते हैं 

  1. Fore Brain ( अग्र मस्तिष्क )
  2. Mid Brain ( मध्य मस्तिष्क )
  3. Hind Brain ( पश्च मस्तिष्क )

Fore Brain ( अग्र मस्तिष्क )

अग्र मस्तिष्क, ब्रेन का महत्वपूर्ण भाग बनाता हैं, जो पुरे मस्तिष्क का लगभग 2/3 भाग का निर्माण करता हैं यह मुख्य रूप से दो भागों से मिलकर बना होता हैं 

Central Nervous System in Hindi ( केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ) Fore Brain

  1. Cerebrum ( प्रमस्तिष्क )
  2. Diencephalon ( अग्रमस्तिष्कपश्च )
Cerebrum ( प्रमस्तिष्क )

यह अग्र मस्तिष्क का सबसे विकसित एंव सबसे बड़ा भाग होता हैं इसको ‘टेल-एनसेफेलॉन’ ( Tel-encephalon ) भी कहा जाता है प्रमस्तिष्क पढ़ने, लिखने, बोलने के लिए महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह दो Hemispheres में बटा हुआ होता हैं

जिसको हम Right & Left Hemispheres कहते हैं और यह मस्तिष्क में जिस Nerve Fiber द्वारा जुड़े रहते हैं उसको Corpus Callosum कहते हैं प्रमस्तिष्क का लेफ्ट Hemispheres शरीर के राईट भाग का नियंत्रण करता हैं,

उसी तरह राईट Hemispheres शरीर के लेफ्ट भाग का नियंत्रण करता हैं प्रमस्तिष्क का काम सोचना, योजना बनाना, तर्क करना, याद रखना, समस्या का समाधान करना, आंख, कान आदि से आने वाली सुचना को ग्रहण करना होता हैं 

बाएं और दाएं लोब प्रत्येक को चार लोब या भागों में विभाजित किया जाता है

  1. पार्श्विका लोब
  2. ललाट लोब
  3. टेम्पोरल लोब
  4. पश्चकपाल लोब
Diencephalon ( अग्रमस्तिष्कपश्च )

यह प्रमस्तिष्क के पीछे एंव नीचे स्थित होता हैं आप कह सकते हैं कि मस्तिष्क के इस भाग में थैलेमस ( Thalamus ), हाइपोथैलेमस ( Hypothalamus ), एपिथैलेमस ( Cpithalomus ) शामिल हैं इसके दो भाग होते हैं 

  1. थैलेमस ( Thalamus )
  2. हाइपोथैलेमस ( Hypothalamus )

थैलेमस ( Thalamus ) – यह Grey Matter से बना अंडाकार आकृति का होता है जो प्रमस्तिष्क के नीचे बीच में स्थित होता है जिसका काम ठंडा, गर्म, पीड़ा, सुख को पहचानने का काम होता हैं 

हाइपोथैलेमस ( Hypothalamus ) – यह थैलेमस के नीचे स्थित होता हैं जिसका काम भूख, प्यास, घृणा, क्रोध – प्यार, इमोशन को नियंत्रित करता हैं और Endocrine Glands से निकलने वाले हार्मोन को नियंत्रित करता है 

Central Nervous System in Hindi ( केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ) Mid Brain

मध्य मस्तिष्क अग्र मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क के बीच का भाग होता हैं इसको Mesencephalon कहा जाता हैं यह मध्य ब्रेन मुख्य रूप से चार बॉडी से मिलकर बना होता हैं जिनको Corpora Quadrigemina कहते हैं मध्य मस्तिष्क के दो भाग होते हैं 

 

Corpora Quadrigemina – यह मध्य ब्रेन के अंदर दो Inferior Optic Lobes व दो Superior Optic Lobes पाए जाते हैं जो मध्य मस्तिष्क के पृष्ठ सतह पर टेक्टम से जुड़े हुए पाए जाते हैं इनको Corpora Quadrigemina कहते हैं इसका काम सुनने और देखने से सम्बंधित उद्दीपकों को ग्रहण करना होता है 

Cerebral Pendlunele – इनको हम क्रूरा सरेब्री भी कहते हैं यह सरिब्रल कॉर्टेक्स को मेरुरज्जू व मस्तिष्क के अन्य भागों के साथ जोड़ता है 

Hind Brain ( पश्च मस्तिष्क )

यह ब्रेन का अंतिम भाग होता हैं जो मुख्य रूप से तीन भागो से मिलकर बना होता हैं 

Central Nervous System in Hindi ( केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ) Hind Brain

  1. Cerebellum 
  2. Pons Varolli
  3. Medulla Oblongata
Cerebellum 

यह ब्रेन का दुसरा सबसे बड़ा भाग होता है यह प्रमस्तिष्क के आधार पर उसके नीचे स्थित होता हैं इसका कोर्टेक्स ( Cortex ) भी Grey Matter से बना होता है इसका काम शरीर का संतुलन बनाने और पेशीय क्रियाओं में संबंध बनाये रखने का काम होता हैं 

मतलब सेरिबैलम कंकाल की मांसपेशियों के विभिन्न समूहों की गतिविधियों को नियंत्रित और समन्वयित करता है और शरीर के रखरखाव को नियंत्रित करता है यह आकार में अंडाकार होता है और इसमें दो गोलार्ध होते हैं,

जिन्हें वर्मिस नामक एक संकीर्ण मध्य पट्टी द्वारा अलग किया जाता है इसे छोटा मस्तिष्क भी कहा जाता है

Pons Varolli

यह मेंडूला ऑवलोंगेटा के ठीक ऊपर व Cerebral Panduncle के नीचे पायी जाती हैं यह White Matter से बना होता है इसका काम Cerebellum की दोनों पालियों को जोड़ना होता हैं Pons श्र्वास का विनिमय करता हैं 

इसमें मुख्य रूप से तंत्रिका तंतु (श्वेत पदार्थ) होते हैं पोंस 5वीं कपाल तंत्रिका और 8वीं कपाल तंत्रिका सहित कई कपाल तंत्रिकाओं से सूचना भी संसाधित करता है।

Medulla Oblongata

यह मस्तिष्क का अंतिम भाग होता हैं जो त्रिभुजाकार होता है तथा Pons व मेरुरज्जु ( Spinal Cord ) मतलब से जुड़ा होता हैं इसकी गुहा को Metacoel कहा जाता हैं इसका काम सांस लेने, खासने, निगलने का केंद्र होता हैं 

यह ह्रदय की धड़कन, रक्तदाब, आहार नाम के क्रमाकुंचन व अन्य अनेक अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है 

Spinal Cord ( मेरुरज्जु )

रीढ़ की हड्डी और नसों का वह समूह होता हैं जो दिमाग का संदेश शरीर के अन्य अंगों तक लेकर चलता हैं उदहारण के लिए, हाथ व पैर तक लेकर जाता हैं मेरुरज्जु  शरीर को आकार भी प्रदान करती हैं मेरुरज्जु छोटी-छोटी 33 हड्डियों से बनी होती हैं

जिसकी लम्बाई ( वयस्क पुरुष में लगभग) 45cm और व्यास लगभग 2 – 2.5 cm होता है रीढ़ की हड्डी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का एक लम्बा, लगभग बेलनाकार हिस्सा है, जो मेनिन्जेस और सीएसएफ से घिरा हुआ कशेरुका नलिका में लटका रहता है।

मेरुरज्जु के अंतिम भाग से नर्व ( Nerve ) का एक गुच्छा निकलता है जिसे Cauda Equina कहते है 

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निष्कर्ष

यहाँ मनोविज्ञान पढने वाले सभी स्टूडेंट्स को तंत्रिका तंत्र किसे कहते हैं? व्यवहार के जैविक आधार, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और न्यूरॉन के कार्य, न्यूरॉन की संरचना एवं कार्य, न्यूरॉन का नामांकित चित्र सभी चीजो को अच्छे से चित्र के साथ समझाया गया हैं 

नोट – एग्जाम के उद्देश्य से यह लेख बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योकि एग्जाम में इससे सम्बंधित एक प्रश्न जरुर आता हैं 

मैं यह उम्मीद करता हूँ कि कंटेंट में दी गई इनफार्मेशन आपको पसंद आई होगी अपनी प्रतिक्रिया को कमेंट का उपयोग करके शेयर करने में संकोच ना करें अपने फ्रिड्स को यह लेख अधिक से अधिक शेयर करें

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