लिबर्टी क्या है? ( Liberty Meaning in Hindi ) पूरा कांसेप्ट 1 क्लिक में पढ़ें

लिबर्टी क्या है? ( Liberty Meaning in Hindi ) पूरा कांसेप्ट 1 क्लिक में पढ़ें

Liberty Meaning in Hindi: – लिबर्टी क्या है? लिबर्टी ( स्वतंत्रता ) स्टूडेंट्स के लिए एक ऐसा विषय हैं जिसके ऊपर वह इन्टरनेट पर इनफार्मेशन खोजते रहते हैं परन्तु स्टूडेंट को इस तरह से नहीं बताया जाता हैं जिससे वह उसको अच्छे से समझ सकें

राजनीतिक विज्ञान में स्वतंत्रता के लिए कुछ शर्ते और सिद्धांत हमे पढने होते हैं जिसमें प्राचीन काल के राजनीतिक थिंकर्स के द्वारा बताये सिद्धांत को हमें समझना होता हैं

ग्रेजुएशन के दौरान स्टूडेंट्स इस टॉपिक को राजनीतिक विज्ञान के अंदर पढ़ते हैं स्वतंत्रता किसे कहतें है? लिबर्टी मीनिंग इन हिंदी? ( Meaning Of Liberty in Hindi ) जैसे अनेक सवालों को सर्च इंजन में खोजा जाता है

लिबर्टी क्या है? ( Liberty Meaning in Hindi ) पूरा कांसेप्ट 1 क्लिक में पढ़ें

हिंदी मीडियम से पढने वाले स्टूडेंट्स के लिए यह ( Liberty in Hindi ) लेख स्वतंत्रता के बारे में सबकुछ समझाने के योग्य हैं इंग्लिश मीडियम के स्टूडेंट इसको इंग्लिश में ट्रांसलेट करके पढ़ सकतें हैं

लिबर्टी क्या है? ( Liberty Meaning in Hindi ) – Liberties Meaning in Hindi?

लिबर्टी ( स्वतंत्रता ) को लैटिन शब्द लिबर ( Liber ) से लिया गया हैं लिबर का अर्थ बंधनों का अभाव होता हैं मतलब जहाँ पर लोगो के ऊपर कम से कम दबाब हो और वह अपनी इच्छा के अनुसार काम कर सकें यह स्थिति आजादी ( स्वतंत्रता ) कहलाती हैं

स्वतंत्रता के लिए तीन शर्तों का होना महत्वपूर्ण होता हैं

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  • विकल्प ( Chocies ) – विकल्प चुनने की आजादी हमारे पास होनी चाहिए लोगो के बीच विकल्प चुनने में भेदभाव न हो उदहारण के लिए, चुनाव में हम तभी आजाद होतें हैं जब हमारे पास विकल्प मौजूद होतें हैं
  • अवसर ( Opportunity ) – हमारे पास आगें बढ़ने के लिए अवसर होने चाहिए जिसके लिए सभी लोगो को एकसमान समझा जाए
  • संसाधन ( Resources ) – सभी संसाधनों पर केवल कुछ लोगो का अधिकार नहीं होना चाहिए

स्वतंत्रता के लिए अपनी कुछ मान्यता हैं

  • निष्पक्षता ( Impartiality )- हमें निष्पक्षता के साथ काम करना होगा
  • योग्यता ( Ability ) – हम जिसके योग्य हैं वह हमें मिलना चाहिए
  • नैतिकता – हम अपनी नैतिकता का उल्लंघन न करें
  • आवश्यक हस्तक्षेप – जरुरत पढने पर स्टेट ( सरकार ) हस्तक्षेप कर सकती हैं क्योकि उसके पास सम्प्रभुता ( पॉवर ) हैं

उदहारण के लिए, पूजा नाम की एक लड़की राजनितिक विज्ञान का एग्जाम देना चाहती हैं क्योकि वह इसका एग्जाम देने के लिए आजाद हैं उसके बीच कोई रुकावट नहीं हैं परन्तु, उसने तैयारी नहीं की हैं इस स्थिति में उसका मन एग्जाम देना का नहीं हैं

अब यहाँ पूजा रह सोचती हैं कि मैं आजाद हूँ तो अब मैं यहाँ नक़ल करूंगी लेकिन यहाँ ऐसा नहीं किया जा सकता हैं क्योकि स्वतंत्रता की अपनी कुछ मान्यताएं हैं अगर पूजा ऐसा करती हैं तो ऐसा करने से अन्य स्टूडेंट्स की आजादी खतरे में आ जायेगी

यहाँ एग्जाम में योग्यता के अनुसार स्टूडेंट्स को नंबर मिलतें हैं इसीलिए पूजा के नक़ल करने से वह अपनी नैतिकता का उल्लंघन करती हैं ऐसे में जरुरत पड़ने पर स्टेट ( जिसके पास पॉवर हैं ) आवश्यक हस्तक्षेप कर सकती हैं

हाब्स ( Hobbes ) – कहतें हैं कि प्रकृतिक अवस्था में जिस तरह से लोगो के पास स्वतंत्रता थी, लोगो के द्वारा स्टेट को बनाने के बाद, वह ऐसा कोई काम नहीं करेगा जिससे लोगो की स्वतंत्रता खतरे में आ जाये मतलब लोगो को बाहरी रूप से बाधा न पहुँचाई जाए  लोगो के पास काम करने के लिए अवसर हैं लेकिन विकल्प नहीं हैं 

प्रकृतिक अवस्था ( State Of Nature ) – जहाँ सोसाइटी, सरकार, फॅमिली नहीं हो बस व्यक्तिगत रूप से लोग रह रहें हैं और ताकतवर लोग कमजोर मनुष्य को दबा रहें हैं ऐसे में एक दुसरे को अपनी जान का ख़तरा रहता हैं इस खतरे से बचने के लिए लोगो ने स्टेट ( सरकार ) को बनाया हैं इसे सोशल कॉन्ट्रैक्ट का सिद्धांत कहा जाता हैं

जॉन लॉक ( John Locke ) – कहतें हैं कि मनुष्य के जन्म के समय पर प्रकृति के द्वारा कुछ प्रकृतिक कानून बनाये गए हैं जिनको हम नेचुरल लॉ ( Natural Law ) भी कहते हैं जिसमें प्रकृतिक कानून के अनुसार, सभी लोगो को प्रकृति ( भगवान् ) ने कुछ अधिकार दिए हैं जिनको कोई छीन नहीं सकता हैं

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  • Life  ( जीवन ) – हमे जीवन जीने का पूरा अधिकार हैं
  • Liberty ( स्वतंत्रता ) – हमें स्वतंत्रता का अधिकार हैं
  • Property( प्रॉपर्टी ) – मनुष्य के शरीर को यहाँ प्रॉपर्टी कहा गया हैं

प्रकृतिक कानून ऐसे काम करने का अधिकार देते हैं जो नैतिकता पर आधारित होते हैं परन्तु, समानता की कीमत चुकाकर स्वतंत्रता प्राप्त करना सही नहीं हैं क्योकि स्वतंत्रता तभी हासिल हो सकती हैं जब हम समानता की उपेक्षा न करें

रूसो ( Rousseau ) – ने समान्य इच्छा का Concept देते हुए कहा कि आजदी का अर्थ अपने स्वार्थों को छोड़ते हुए पुरे समूह के व्यापक शुभ के लिए काम करना होता हैं

नोट – जिस तरह जॉन लॉक और हाब्स के द्वारा स्वतंत्रता को प्रकृतिक अधिकार कहा ( माना ) गया हैं रूसो ने ऐसा नहीं कहा

रूसो के अनुसार, सोसाइटी के अंदर जब पापुलेशन बढ़ने लगी तब सोसाइटी में रहने वाले लोगो को कुछ लोगो से डर लगने लगा तब जिन लोगो को डर महसूस होने लगा उन्होंने कहा कि हम स्वतंत्र नहीं हैं जिसके बाद,

इन लोगो ने गैर आजादी से मुक्ति के लिए स्वतंत्र की मांग की यहाँ से स्वतंत्रता का Concept निकलकर आया यह तभी होगा जब हम अपने स्वार्थ के लिए नहीं, बल्की सोसाइटी के लिए काम करना हैं

रूसो कहते हैं कि स्वतंत्रता के लिए बाधा तब उत्त्पन्न हो सकती हैं जब सोसाइटी में असमानता हो, इसके लिए किसी व्यक्ति या संस्थाओं पर निर्भर नहीं रहना हैं सब मिलकर सम्पूर्ण समुदाय पर निर्भर हो जाए क्योकि ऐसा होने पर लोग बिना किसी स्वार्थ के काम करेंगी जिससे पुरे समुदाय पर समान प्रभाव पडेगा जिसके बाद असमानता नहीं होगी और हम स्वतंत्रता हासिल कर सकेंगे

असमानता – असमानता दो तरह की होती हैं प्रकृतिक असमानता और सोसाइटी में असमानता 

प्रकृतिक असमानता – इसमें नेचर के द्वारा होने वाली असमानता शामिल होती हैं जिसमें कोई मनुष्य गोरा हैं, काला हैं, छोटा हैं, बड़ा हैं जैसी असमानता आती है

सोसाइटी में असमानता – इसमें सोसाइटी के द्वारा बनाई गई असमानता हमारी स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करती है जिसमें ऊँची जात, नीची जात, दास हैं, गुलाब हैं जैसी असमानता आती हैं

रूसो ने सामाजिक अनुबंध बुक में कहा कि कानून के पालन करने से ही स्वतंत्रता हासिल कर सकतें हैं व्यक्ति स्वतंत्र जन्म लेता हैं लेकिन हर जगह जंजीर से जकड़ा हुआ होता हैं

महत्त्वपूर्ण प्रशन – व्यक्ति स्वतंत्र जन्म लेता हैं लेकिन हर जगह जंजीर से जकड़ा हुआ होता हैं

ऐसा इसीलिए होता हैं क्योकि हमें कानून का पालन करना होता हैं क्योकि कई बार ऐसे कानून होते हैं जो मनुष्य ( हमारे ) लिए सही होतें हैं परन्तु, कई बार ऐसे कानून होते हैं जो हमें वह काम करने से रोकते है जिसे करने से हमें लाभ मिलता हैं

उदहारण के लिए, किसी समूह को पॉलिटिक्स ज्वाइन करने से मना करना

इसीलिए यहाँ रूसो कहते हैं कि जब हम पैदा होते हैं तब हम स्वतंत्र ( आजाद ) होते हैं लेकिन हर जगह जंजीरों में हम जकड़े हुए होते हैं और इससे छुटकारा तभी मिल सकता हैं जब सभी लोग अपना शासन खुद चलायेंगे

उपयोगितावादी का सिद्धांत ( Utilitarianism )

उपयोगितावादी का सिद्धांत कहता हैं कि अगर किसी व्यक्ति को कोई कार्य करने से अधिकतम ख़ुशी मिल रही हैं तो उसे वह काम करने दिया जाए ( यह सिद्धांत जेरेमी बेंथम ने दिया हैं )

परन्तु, ऐसा करने में जेरेमी बेंथम की आलोचना होती हैं

उदहारण वन – मान लेतें हैं कि किसी मनुष्य को मर्डर करने में मजा आता हैं तो क्या हमें उसे यह काम करने देना चाहिए? नहीं?

उदहारण टू – सूर्य को डूबता या उगते हुए देखने की इच्छा होने पर हम ऐसा कर सकते हैं क्योकि हम इसे लिए स्वतंत्र हैं परन्तु अगर किसी प्रकार का नशा करने की इच्छा हमारी होती हैं तो क्या हमें यह करना चाहिए? नहीं?

जेरेमी बेंथम के स्टूडेंट जे. एस. मिल ने आलोचना करते हुए कहा कि अपनी बुक ऑन लिबर्टी में अपना सिद्धांत देते हुए कहा कि बहुमत के लोगो के विचार अल्पमत के लोगो पर थोपना स्वतंत्रता नहीं होती हैं क्योकि ऐसा करने बहुमत का दमन कर दिया गया स्वतंत्रता तब हैं जब बहुमत और अल्पमत दोनों की बात सुनकर सही – गलत का फैसला किया जाए

उदहारण के लिए, एक क्लास में 40 स्टूडेंट हैं जिसमें से 36 स्टूडेंट अध्यापक से कहते हैं कि हमारा आज पढाई करने का मन नहीं हैं तो क्या इस पीरियड को खाली छोड़ सकते हैं परन्तु 4 स्टूडेंट बोलते हैं कि नहीं सर क्लास होनी चाहिए

अब इस स्थिति में अध्यापक अधिक स्टूडेंट की बात को मानकर पीरियड खाली नहीं कर सकते है क्योकि ऐसा करना बहुमत के विचारों को अल्पमत पर थोपना होगा यहाँ अध्यापक बहुमत और अल्पमत दोनों स्टूडेंट की बात सुनकर सही फैसला लें तब यह स्वतंत्रता होगी

जे. एस. मिल कहते हैं कि स्वतंत्रता तभी रहेगी जब तक लोगो के जीवन में समाज या राज्य के द्वारा हस्तक्षेप न किया जाए हमें अलग अलग विचारों के लोगो की बात सुननी चाहिए क्योकि विचार में भिन्नता होने के कारण राज्य में प्रगति ( तरक्की ) होती हैं

जे. एस. मिल के अनुसार स्वतंत्रा में तीन शर्तें होनी चाहिए

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अभिव्यक्ति स्वतंत्रा

  • दबाया गया विचार सही हो – अगर 40 मनुष्य में से 1 मनुष्य अलग विचार वाला हैं तो उस अलग विचार वाले एक मनुष्य के विचारो को हमें सुनना चाहिए क्योकि हो सकता है कि दबाया गया विचार सही हो
  • विरोधी द्रष्टिकोण  – जब दो द्रष्टिकोण एक दुसरे के विपरीत है तो उसको हमें सुनना चाहिए क्योकि जब टकराव होगा तब हमें सच्चाई का पता चलेगा
  • सच्चाई के तत्व – लोगो के विचार सुनने पर अगर कुछ लोग गलत विचार बोल रहे हैं तो उनके गलत में भी सच्चाई के कुछ तत्व होते हैं
  • कमियों को दूर करना – सभी लोगो के विचारो को सुनने के बाद हमे सबकुछ समझ आने के बाद हम कमियों को ढूढ़कर उसे दूर कर सकते हैं

व्यक्तिगत स्वतंत्रा

यहाँ जे. एस. मिल कहते है कि हम ( मनुष्य ) एक समाजिक प्राणी हैं इसीलिए, हमें समज के लोगो के साथ मिलकर रहना हैं लेकिन हमारी एक व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी हैं इसीलिए हमे अपने व्यक्तिगत को डेवलप करने के लिए स्वतंत्रता मिलनी चाहिए क्योकि हर व्यक्ति समाज का हिस्सा होता हैं और अगर व्यक्ति कुछ करता हैं तो उसका असर पुरी सोसाइटी पर पडेगा

व्यक्ति के कार्य स्वतंत्रा

जे. एस. मिल ने व्यक्ति के कार्यों को मुख्य रूप से दो भागों में रखा गया हैं

  • स्वय संबंध ( Self Regard ) – जब मैं कोई ऐसा काम करता हूँ जिसका असर केवल मेरे ऊपर पड़ता हैं तो राज्य मुझे वह काम करने से नहीं रोक सकता हैं
  • दुसरे संबंध ( Other Regard ) – लेकिन जब मैं कोई ऐसा काम करता हूँ जिसका असर किसी अन्य मनुष्य पर पड़ता हैं तो यहाँ राज्य हस्तक्षेप करेगी

( Important Question For Exam )  Isaiah Berlin ( इजाया बर्लिन ) 

सवाल है कि सकारात्मक और नकारात्मक स्वतंत्रता में अंतर 

इजाया बर्लिन ने स्वतंत्रता के दो सिद्धांत ( 1969 ) बुक, में स्वतंत्रता के लिए अपना सिद्धांत दिया जिसमें इन्होने स्वतंत्रता को दो भागो में रखा “सकारात्मक” और “नकारात्मक”

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सकारात्मक स्वतंत्रता ( Positive Liberty )

सकारात्मक स्वतंत्रता में अगर एक मनुष्य के काम करने से किसी दुसरे मनुष्य को खतरा होता हैं तो इसमें राज्य हस्तक्षेप करेगा इसमें मनुष्य को आत्म विकास करने का पूरा अवसर मिलता हैं जिसका प्रयोग करने के लिए आपको आजादी मिलती हैं मतलब इसमें आजादी की प्रयोग अवधारणा हैं

रूसो – पॉजिटिव स्वतंत्रताहमे तभी हासिल हो सकती हैं जब हम नैतिक कानूनों का पालन करें तभी आपको सच्ची स्वतंत्रता मिलती हैं मतलब जब आप ऐसे कानून का पालन कर रहे हैं जो सभी लोगो के लिए सही हैं तो ऐसी स्थिति में आपकी स्वतंत्रता पॉजिटिव हैं

हरबर्ट मार्क्यूज – इन्होने कहा कि जो लेबर क्लास के लोग हैं उनको सही दिशा दिखानी होगी जिससे लेबर क्लास के लोगो का कोई शोषण न कर सकें यहाँ राज्य आवश्यक हस्तक्षेप करेगा

जेम्स मिल – कहते हैं कि सोसाइटी में जितने लोग हैं उन सभी लोगो में हमें पिछड़े लोगो पर अधिक ध्यान देना होगा क्योकि स्वतंत्रता तभी मिलेगी मतलब यहाँ राज्य पिछड़े लोगो के लिए ऐसे साधन और अवसर बनायेगा जिससे वह आगे बढ़ पाए

जे.एस. मिल ने कहा कि एक मनुष्य में काम में राज्य को दखल नहीं देना चाहिए क्योकि जब राज्य ऐसा नहीं करता हैं तो वह मनुष्य अपने गुण का विकास ( पर्सनालिटी को डेवलप ) करता हैं

चार्ल्स टेलर – इन्होने दो पॉइंट बताये हैं –

  1. आजादी की अवसर अवधारणा – इसमें मनुष्य के पास केवल अवसर हैं परन्तु उन अवसर का फायदा उठाने के फायदे नहीं हैं इसीलिए यह नकारात्मक स्वतंत्रता हैं
  2. आजादी की प्रयोग अवधारणा – इसमें मनुष्य के पास अवसर हैं और उनका फायदा उठाने का साधन भी हैं तो यह पॉजिटिव स्वतंत्रता हैं

नकारात्मक स्वतंत्रता ( Negative Liberty )

एक मनुष्य के काम करने में बाहरी रूप से कोई हस्तक्षेप न किया जाए उसका जो मन है उसको वह काम करने दिया जाए क्योकि ऐसे में जब राज्य के द्वारा मनुष्य पर रोकटोक लगाई जाती है तो ऐसी स्थिति में मनुष्य की स्वतंत्रता खतरे में आ जाती हैं

परन्तु नकारात्मक स्वतंत्रता में राज्य केवल लोगो की जान की रक्षा करने का काम करे मतलब राज्य को यहाँ कम से कम काम करना है और अधिकतम काम लोग खुद कर लेंगे यहाँ Laisser Faire के सिद्धांत का उपयोग होता हैं .

इजाया बर्लिन नकारात्मक स्वतंत्रता में यह कहते हैं कि

  • मनुष्य के पास तर्क हैं – अगर कोई मनुष्य कोई काम कर सकता हैं और उसको ऐसा करने से रोक दिया जाए तो ऐसा करना गलत हैं क्योकि मनुष्य के पास बुद्धि ( तर्क ) हैं इसीलिए उसको यह पता है कि क्या सही हैं और क्या गलत?
  • राज्य की सीमित भूमिका – राज्य केवल लोगो की जान की सुरक्षा करेगा इसमें राज्य की भूमिका सीमित रहेगी

नकारात्मक स्वतंत्रता में आजदी की अवसर अवधारणा होती हैं परन्तु यह साधन की बात नहीं करता हैं

उदहारण के लिए, चुनाव में अगर कोई कैंडिडेट खड़ा हो रहा है लेकिन उसको रोक दिया जाए तो ऐसा करना बाहरी हस्तक्षेप हैं परन्तु, नकारात्मक स्वतंत्रता राज्य को ऐसा करने से मना करती हैं

फ्रेड्रिक हेयक और रोबर्ट नॉजिक 

फ्रेड्रिक हेयक कहते  हैं कि

  1. नकारात्मक स्वतंत्रता में कोई बंधा नहीं होनी चाहिए
  2. इसमें कोई मनुष्य किसी मनुष्य को अपने बात मनवाने के लिए बल का प्रयोग न करे
  3. किसी एक व्यक्ति पर राज्य या अन्य व्यक्ति के द्वारा इच्छा नहीं थोपी जा सकती हैं
  4. अगर कानून हैं तो वह नकारात्मक स्वतंत्रता में ना के बराबर हैं

रोबर्ट नॉजिक कहते कि 

जब किसी मनुष्य की मर्जी के बिना उसको कर्तव्य देना गलत होता हैं मतलब व्यक्ति के पास अधिकार हैं परन्तु किसी मनुष्य की सहमति के बिना उसको कर्तव्य दे दी जाती हैं ऐसा नहीं होना चाहिए क्योकि ऐसा होने से मनुष्य की स्वतंत्रता को खतरा होता है रोबर्ट नॉजिक का कहना है कि जो व्यक्ति योग्य है उसको विजय मिलनी चाहिए

उदहारण के लिए, नेशनल फ्लैग का सम्मान करना,

स्वतंत्रता के लिए कुछ ऐसे परिभाषा है जो अलग अलग राजनीतिक लेखक के द्वारा दी गई हैं

सीले – स्वतंत्रता, अतिशासन का विलोम हैं मतलब स्वतंत्रता इसीलिए हैं ताकि हम तानाशाही से बच सके

मैक्कीन – स्वतंत्रता सभी प्रतिबंधो का अभाव नहीं, बल्कि अताकिक प्रतिबंधो का अभाव हैं मतलब ऐसे प्रतिबंधो को समाप्त कर दो, जो लोगो की स्वतंत्रता पर जान बुझकर लगाया गया हो

जे.एस. मिल – स्वतंत्रता प्रतिबंध का अभाव हैं प्रतिबंधो के रूप में हर प्रतिबंध दोष हैं और लोगो को नियंत्रित करने से बेहतर उन्हें अपनी इच्छा पर छोड़ देना है

लिओस्टॉस – मानव जीवन में ऐसा कोई संबंध नहीं हैं जिसमे वह दुसरो से संबंधित न हो अथार्थ वह पुरी तरह से मुक्त हो स्वतंत्रता की व्यापक भावना स्वतंत्रता पर प्रतिबंध की मांग करती हैं मतलब किसी मनुष्य को इतनी आजादी न हो कि उसकी आजादी से किसी दुसरे मनुष्य की आजादी छीन जाए

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निष्कर्ष

स्वतंत्रता के ऊपर पॉलिटिकल थिंकर्स के विचार, सिद्धांत स्वतंत्रता की परिभाषा और सकारात्मक स्वतंत्रता और नकारात्मक स्वतंत्रता के विषय पर इस लेख में स्टूडेंट्स के लिए उपयोगी इनफार्मेशन शेयर की गयी हैं

मैं यह उम्मीद करता हूँ कि कंटेंट में दी गई इनफार्मेशन आपको पसंद आई होगी अपनी प्रतिक्रिया को कमेंट का उपयोग करके शेयर करने में संकोच ना करें अपने फ्रिड्स को यह लेख अधिक से अधिक शेयर करें

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